कारलो गुरु ज्न्यान
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| कारलो गुरु ज्न्यान |
ये
एक अबधारना
आज
नहीं कबसे है
हरकोइमें
है ये ख्वाब की
बांटने
से कोई चीज खत्म होजाता
इसीलिए
इसिपे हरकोईकी है हिचकिचाहट
कोई
चाहते नहीं किसीको कुछ देनेको
सिबाय
दिल सायद मुफ्त मिलजाता II
ये
अनुचिंतन भी कियाजाता खंडन
लो
देखलो सुरजको डालताजाता किरण
हरकोइके
पर बांटता जाता एकही प्रकरण
कभी
होता काहाँ ख़त्म बढताजाता स्व्वाभिमान
हरकोई
मानते सुरजको शक्तिकी उस्स शक्तिमान
आलोक
और उर्जाका मुर्तिबंत प्रतीयमान
हरकोई
जताते आभार देते धर्मराजका स्थान II
बिद्या
भी जगत में एसी एक चीज
जो
बांटने से कभी ख़त्म होता नहीं
बरग़
बढ़ता जाता देनेवालेके पास
ब्यक्तिको
बिकसित करता देता सर्बोच स्थान
बनाता
मानबको महामानब न्ज्यानबान
इसीलिए
हमेसा मतकरो बिलकुल हिचकिचाहट
कुछ
देनेको बांटने को कर्तेजाओ अनुदान
कोई
बुराई है नहीं यहीं करलो ये गुरु ज्न्यान
इसीमें
अच्छाई ही अच्छाई हीहै येहै सार जीबन II

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